रूस का यूक्रेन पर हैं हमला करना पूरी दुनिया की एक आने पर असर डाल रहा है इससे इंडियन स्टॉक मार्केट भी अछूता नहीं है हालांकि के वीरवार के बाद इंडियन मार्केट में कुछ सुधार हुआ लेकिन फिर भी यह डाउनट्रेंड में ही चलता रहेगा अगर आने वाले वक्त में यह युद्ध ना रोका स्टॉक मार्केट का एनालाइज करने वालों ने कहा है की ऑटो फॉर मोबाइल जागेश और पेंट बनाने वाली कंपनियां इससे बहुत ज्यादा एफीक्ट होगी सबसे पहले बात कर लेते हैं ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे ज्यादा प्रभाव ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ेगा और इसकी चेन सप्लाई पर पड़ेगा क्योंकि युद्ध के कारण जियोपोलिटिकल रिलेशनशिप में बहुत ज्यादा खींचतान देखने को मिलेगी इसलिए कमोडिटी प्राइस जैसे स्टील एंड मिनी कॉपर लेड और क्रूड ऑयल प्लास्टिक और रबड़ के पदार्थ महंगे हो जाएंगे जो भी कंपनियां यूरोप में लगी हुई है जो इन सब चीजों का निर्माण करते हैं वह भी इससे इंपैक्ट होंगे यूरोप की पूरी कंट्री और रूस पर डिपेंड करती हैं अपनी एनर्जी की जरूरतों के लिए और अगर उसने सप्लाई को काटा तो उनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पाएंगे इसका इफेक्ट भी हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि यूरोप में गैस प्राइस बहुत महंगी हो गयी है।दूसरा अमेरिका के लगाए हुए सैंक्शंस जो के अमेरिका रूस पर लगा रहा है उसकी वजह से भी सेल्स पर बहुत ज्यादा इफेक्ट पड़ेगा अगर बात करें महिंद्रा की तो महिंद्रा की कंपनियां 49% यू आर पी ए न क्षेत्रों में अपने मैन्युफैक्चरिंग सेट अप करती हैं और इसमें वह 49 परसेंट की कमी आई है और अपोलो टायर्स भी 33% सेल्स की कमी देखने को मिल रही है इससे प्रभावित होने वाला अगला सेक्टर फार्मा सेक्टर है पर पंकज रेडी जो कि आई सी आई सी डायरेक्टर हेड ऑफ रिसर्च हैं उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन का युद्ध फार्मा सेक्टर पर इतना बड़ा प्रभाव नहीं डाल सकता हालांकि रूस राम मटेरियल का मेजर सोर्स नहीं है फार्मा कंपनीज के लिए उन्होंने कहा है कि फार्मा कंपनियां 2% के गेम से शुक्रवार को रिबाउंड किया और पिछले महीने में 5 परसेंट कालोसमी हुआ
अगला जो सेक्टर है जिन पर विशेष लोगों की राय है वह ऑयल एंड गैस ऑयल एंड गैस का प्राइस अभी $100 पर बैरल पर चल रहा है और यह आने वाले वक्त में बहुत सारी कंपनियों को प्रभावित करेगा और आने वाले वक्त में इसके अंदर 15 परसेंट की बढ़ोतरी होने का भी खर्चा है और यह $115 प्रति बैरल पर पहुंच सकता है इसका मतलब यह हुआ कि मोबाइल कंपनियों से जुड़े हुए शेरों के प्राइस बढ़ सकते हैं जैसे इन टू इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन भारत पैट्रोलियम और हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉर इन सभी के प्राइस में बढ़ोतरी हो सकती है
आगे चल कर बात करते हैं पेंट करने वाली कंपनी पेंट कंपनियां भी इस से जुड़ी हुई है क्योंकि वह भी अपने बहुत सारे मटेरियल को हालांकि पेंट कंपनियों समान को बनाने के लिए टाइटेनियम डाइऑक्साइड आदि पर निर्भर करती है पेंट बनाने वाली कंपनियों के स्टॉक प्राइस में भी पिछले साल 18 से 20 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है और इसमें हम समझ सकते हैं कि एशियन पेंट बरजर पेंट और कंसाई नैरोलैक जैसी कंपनियों के शेयर प्राइस बढ़ सकते हैं।
अगला जो सेक्टर है जिन पर विशेष लोगों की राय है वह ऑयल एंड गैस ऑयल एंड गैस का प्राइस अभी $100 पर बैरल पर चल रहा है और यह आने वाले वक्त में बहुत सारी कंपनियों को प्रभावित करेगा और आने वाले वक्त में इसके अंदर 15 परसेंट की बढ़ोतरी होने का भी खर्चा है और यह $115 प्रति बैरल पर पहुंच सकता है इसका मतलब यह हुआ कि मोबाइल कंपनियों से जुड़े हुए शेरों के प्राइस बढ़ सकते हैं जैसे इन टू इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन भारत पैट्रोलियम और हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉर इन सभी के प्राइस में बढ़ोतरी हो सकती है
आगे चल कर बात करते हैं पेंट करने वाली कंपनी पेंट कंपनियां भी इस से जुड़ी हुई है क्योंकि वह भी अपने बहुत सारे मटेरियल को हालांकि पेंट कंपनियों समान को बनाने के लिए टाइटेनियम डाइऑक्साइड आदि पर निर्भर करती है पेंट बनाने वाली कंपनियों के स्टॉक प्राइस में भी पिछले साल 18 से 20 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है और इसमें हम समझ सकते हैं कि एशियन पेंट बरजर पेंट और कंसाई नैरोलैक जैसी कंपनियों के शेयर प्राइस बढ़ सकते हैं।
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